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सोमवार, 1 सितंबर 2014

1975 - 1977 इमरजेंसी का सच .....!


अब उस इमरजेंसी की बात करते हैं जिसे इंदिरा गाँधी ने भारत में घोषित कर दिया था!
 
इसका कारण कुछ और ही था! हुआ ये कि 12 जून 1975, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पाया कि इंदिरा गाँधी ने अपने चुनाव अभियान के दोरान सरकारी मशीनरी का जमकर दुरूपयोग किया था और इसके लिए उसे दोषी करार दे दिया गया! उच्च न्यायालय ने इंदिरा गाँधी के उस चुनाव को अवैद घोषित कर दिया और इंदिरा को लोक-सभा की सीट से हटा दिया ! यही नहीं अदालत ने इंदिरा गाँधी को 6 साल तक कोई भी चुनाव लड़ने पर प्रतिबंद लगा दिया! उधर जी पी की अगुवायी में देश ने

गाँधी परिवार की डिग्रिया.....!


अब इस खानदान की डिग्रियाँ देखिये ...............................
प्रधानमन्त्री बनने के बाद राजीव गाँधी ने लन्दन की एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में अपने-आप को पारसी की सन्तान बताया था, जबकि पारसियों से उनका कोई लेना-देना ही नहीं था,क्योंकि वे तो एक मुस्लिम की सन्तान थे जिसने नाम बदलकर पारसी उपनाम रख लिया था । हमें बताया गया है कि राजीव गाँधी केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के स्नातक थे, यह अर्धसत्य है... ये तो सच है कि राजीव केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में मेकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र थे, लेकिन उन्हें वहाँ से बिना किसी डिग्री के निकलना पडा था, क्योंकि वे लगातार तीन साल फ़ेल हो गये थे... लगभग यही हाल सानिया माईनो का था...हमें यही बताया गया है कि वे भी

फिरोज गाँधी का इतिहास

अब चलते है राजीव गाँधी के
पिता फिरोज गाँधी के इतिहास के बारे मैं कुछ जानने ....................अपनी पुस्तक "द नेहरू डायनेस्टी" में लेखक के.एन.राव लिखते हैं....ऐसा माना जाता है कि जवाहरलाल, मोतीलाल नेहरू के पुत्र थे और मोतीलाल के पिता का नाम था गंगाधर । यह तो हम जानते ही हैं कि जवाहरलाल की एक पुत्री थी इन्दिरा प्रियदर्शिनी नेहरू । कमला नेहरू उनकी माता का नाम था, जिनकी मृत्यु स्विटजरलैण्ड में

इंदिरा गाँधी की मौत शायद एक षड्यंत्र

अब ज़रा इस परिवार के अन्दर के षड्यंत्रकारियों और सत्ता हथ्याने की उनकी चालाकियों के बारे में जान लिया जाये!

इंदिरा गाँधी को बेशक गोलिया मरी गयी थी लेकिन उनकी मृत्यु उनके दिल या दिमाग को गोलियां द्वारा बेधने से नहीं हुई, बल्कि बहुत ज्यादा खून बह जाने के कारण हुई थी! जब इंदिरा गाँधी को गोली लग चुकी थी तब सोनिया गाँधी ने

नेहरु परिवार के आदरणीय लोगो का चरित्र चित्रण !

अब ज़रा इस परिवार के बहुत ही ज्यादा आदरनीय लोगो के चरित्र पर प्रकाश डालता हूँ !

भारतीय सिविल सेवा के एम ओ मथाई जिन्होंने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निजी सचिव के रूप में भी कार्य किया. मथाई जी ने एक पुस्तक “Reminiscences of the Nehru Age”(ISBN-13: 9780706906219) 'लिखी !
किताब से पता चलता है कि वहाँ जवाहर लाल नेहरू और माउंटबेटन एडविना (भारत, लुईस माउंटबेटन को अंतिम वायसराय की पत्नी) के बीच गहन प्रेम प्रसंग था..
ये प्रेम सम्बंद इंदिरा गांधी के लिए महान शर्मिंदगी का एक स्रोत था! इंदिरा गाँधी अपने पिता जवाहर लाल नेहरु को इस सम्बंद के बारे में समझाने हेतु मोलाना अबुल