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सूचनाः- ये ब्लॉग 10 नवंबर 2014 को खुलासों की दुनिया के साथ बदल दिया जाएगा क्योकि बहुत साड़ी एक जैसी पोस्ट होने के कारण पाठकों को दिक्कत होती है। 10 नवंबर 2014 से हमारे ये ब्लॉग होंगे :- हिंदुत्व की आवाज @ www.savdeshi.blogspot.com
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सोमवार, 1 सितंबर 2014

नेहरु परिवार के आदरणीय लोगो का चरित्र चित्रण !

अब ज़रा इस परिवार के बहुत ही ज्यादा आदरनीय लोगो के चरित्र पर प्रकाश डालता हूँ !

भारतीय सिविल सेवा के एम ओ मथाई जिन्होंने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निजी सचिव के रूप में भी कार्य किया. मथाई जी ने एक पुस्तक “Reminiscences of the Nehru Age”(ISBN-13: 9780706906219) 'लिखी !
किताब से पता चलता है कि वहाँ जवाहर लाल नेहरू और माउंटबेटन एडविना (भारत, लुईस माउंटबेटन को अंतिम वायसराय की पत्नी) के बीच गहन प्रेम प्रसंग था..
ये प्रेम सम्बंद इंदिरा गांधी के लिए महान शर्मिंदगी का एक स्रोत था! इंदिरा गाँधी अपने पिता जवाहर लाल नेहरु को इस सम्बंद के बारे में समझाने हेतु मोलाना अबुल
कलाम आज़ाद कि मदद लिया करती थी!
यही नहीं, जवाहर लाल का सरोजिनी नायडू की पुत्री पद्मजा नायडू के साथ भी प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिसे बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया था!
इस बात का खुलासा भी हुआ है कि जवाहर लाल नेहरु अपने कमरे में पद्मजा नायडू की तस्वीर रखते थे जिसे इंदिरा गाँधी हटा दिया करती थी!
इन घटनाओं के कारण पिता-पुत्री के रिश्ते तनाव से भरे रहते थे!
आगे पढ़िए!
उपरोक्त सम्बन्धों के अतिरिक्त भी जवाहर लाल नेहरु के जीवन में बहुत सी अन्य महिलाओं से नाजायज़ ताल्लुकात रहे हैं!
नेहरु का बनारस की एक सन्यासिन शारदा(श्रद्धा) माता के साथ भी लम्बे समय तक प्रेम प्रसंग चला !
यह सन्यासिन काफी आकर्षक थी और प्राचीन भारतीय शास्त्रों और पुराणों में निपुण विद्वान थी!
जब उस सन्यासिन ने अपने इस रिश्ते को अवैध से वैध बनाना चाहा और नेहरु के सामने शादी का प्रश्न उठाया, तब नेहरु ने साफ़ जवाब दे दिया क्यूंकि इससे नेहरु के राजनीतिक जीवन पर असर पड़ सकता था ! उनके सम्बन्धों से एक बेटा पैदा हुआ था और वह एक ईसाई मिशनरी बोर्डिंग स्कूल में रखा गया था. उनके जन्म तिथि के लिए 30 मई1949 होने का अनुमान है. वह अपने शुरुआती साठ के दशक में अब हो सकता है!
ऐसे मामलों में convents बच्चे के अपमान को रोकने के लिए गोपनीयता बनाए रखते हैं! हालांकि मथाई बच्चे के अस्तित्व की पुष्टि की,लेकिन कभी कोई प्रयास नहीं किया गया उसे खोज निकालने का! निश्चय ही वह बच्चा एक ईसाई के रूप में बड़ा हुआ होगा जिसे यह नहीं मालूम होगा कि उसका वास्तविक पिता कौन था !
अब इस परिवार कि चालाकियों और षड़यंत्र के बारे में संदेह पैदा करने वाली कुछ घटनाओं को याद करते हैं !
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत के प्रधानमंत्री के पद के लिए जवाहरलाल नेहरू के प्रतियोगियों में थे और उन दोनों को रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई।
इन सभी तथ्यों को जानने के बाद, वहाँ बाल दिवस के रूप में नेहरू के जन्मदिन को मनाना कहाँ तक उचित है!?
खैर अभी तो पूरा परिवार इन गुणों से भरा पड़ा है!

एस. सी. भट्ट की एक पुस्तक“The great divide: Muslim separatism and partition” (ISBN-13:9788121205917) के अनुसार --जवाहरलाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी अपने पिता के कर्मचारी सयुद हुसैन के साथ भाग गई. तो मोतीलाल नेहरू जबरदस्ती उसे वापस ले आया और एक रंजीत पंडित नाम के एक आदमी के साथ उसकी शादी कर ली.
इंदिरा प्रियदर्शिनी को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था लेकिन वहां से बेकार प्रदर्शन के लिए बाहर निकाल दिया गया!.

बाद में उसे शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन, रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उसे वहां से खराब आचरण के लिए बहर निकाल दिया !
शांति निकेतन से निकाले जाने के बाद इंदिरा अकेलेपन से ग्रस्त हो गई ! उसकी माँ की तपेदिक से मृत्यु हो चुकी थी और बाप राजनीति में व्यस्त था! इस अकेलेपन में उसे साथ मिला फ़िरोज़ खान नाम के एक युवक का जो उन दिनों मोतीलाल नेहरु की हवेली में शराब आदि की सप्लाई करने वाले एक पंसारी नवाब खान का बेटा था! फिर महाराष्ट्र के राज्यपाल डा. श्रीप्रकाश ने नेहरू को इस बारे में चेतावनी भी दी थी कि इंदिरा का फिरोज खान के साथ एक अवैध संबंध चल रहा था! फ़िरोज़ खान इंग्लैंड में पढ़ा हुआ एक युवक था जो इंदिरा से बहुत सहानुभूति रखता था! जल्दी ही इंदिरा ने अपना धर्म फिर से बदल लिया और मुस्लिम धर्म अपना कर फिरोज से लंदन की एक मस्जिद में शादी कर ली ! अब इंदिरा प्रियदर्शनी नेहरु का नाम बदल कर मैमुना बेगम हो चुका था! कमला नेहरु इस बात से जल भुन गई ! उधर जवाहर लाल नेहरु भी परेशान था क्यूंकि इससे फिर उसके राजनितिक जीवन पर असर पड़ना था!
तो अब जवाहर लाल ने फ़िरोज़ खान को उसका उपनाम बदल कर गाँधी रखने को कहा! और उसे विश्वास दिलवाया कि सिर्फ उपनाम खान की जगह गाँधी इस्तेमाल करो और धर्म बदलने की भी कोई जरुरत नहीं है! यह सिर्फ एक एफिडेविट से नाम बदलने जैसा था! तो फ़िरोज़ खान अब फ़िरोज़ गाँधी बन गया लेकिन यह नाम उतना ही अजीब लगता है जितना कि अगर किसी का नाम बिस्मिल्लाह शर्मा रख दिया जाये !

दोनों ने अपना उपनाम बदल लिया और जब दोनों भारत आये तो भारत की जनता को बेवकूफ बनाने के लिए हिन्दू विधि विधान से शादी कर दी गई!


तो अब इंदिरा गाँधी कि आने वाली नसल को एक नया फेंसी नाम गाँधी मिल गया था!

नेहरु और गाँधी ये दोनों नाम ही इस परिवार के खुद के बनाये हुए उपनाम हैं!
जैसे एक गिरगिट अपना रंग बदलता है उसी तरह इस वंश ने अपनी गतिविधयों को छुपाने के लिए अपने नाम बदलें हैं!

4 टिप्‍पणियां:

  1. कहाँ है पकिस्तान ?

    इस शीर्षक को देख कर लोग जरुर चौंक जायेगे ,क्योंकि लोग उसी पाकिस्तान को जानते हैं , जिसे धर्म के आधार पर भारत को विभाजित करके बनाया गया था .और जो साठ साल से भारत के साथ क्षद्म युद्ध छेड़े हुए है . और आजकल जिसका प्रधान मंत्री नावाज शरीफ है .जिसके इशारे पर नापाक सैनिकों ने भारत की सीमा में घुस कर धोखे से रत को ही हमारे सैनिकों को शहीद कर दिया .
    लेकिन यह तो पाकिस्तान का वह स्वरूप है ,जो दिखाई देता है .परन्तु एक और पाकिस्तान है ,जो गुप्त रूप से भारत के अन्दर ही मौजूद है ,और लोग उसके बारे में खुल कर मुंह नहीं खोलते . क्योंकि उनके मुंह पर सेकुलर ढक्कन लगा हुआ है .इस गुप्त पाकिस्तान बारे में और इसके मंसूबों के बारे में सही जानकारी के लिए हमें पाकिस्तान की बुनियाद खोदना होगी .

    1-पाकिस्तान की पैदायश
    जिस तरह किसी ईमारत को बनाने के लिए पहले भूमि खरीदी जाती है ,फिर नक्शा बनाया जाता है . तब निर्माण की सामग्री जमा करा कर . किसी इंजिनियर की देखरेख में ईमारत बनवाई जाती है .इसी तरह पाकिस्तान की जमीन तो 29 दिसंबर 1930 को इलाहबाद में तय्यार हो गयी थी . जब "अल्लामा इकबाल " की अध्यक्षता में मुस्लिम लीग का 25 वां सम्मलेन हुआ था .इसका मुख्य विषय तुर्की की इस्लामी हुकूमत था क्योंकि .सन 1909 तक तुर्की पर " खलीफा अब्दुल हामिद" राज करता था . जो विश्व के सभी मुसलमानों के लिए वही दर्जा रखता था .जो इसाई देशों में पोप का है .
    लेकिन 13 अप्रेल सन 1909 को अंगरेज सेना ने "समर सेट आर्थर गोघ (Somerset Aurthor Gough "के नेतृत्व में खलीफा को गद्दी से उतार दिया था .परन्तु खलीफा ने गद्दी से उतरते समय सभी मुसलमानों को अंगरेजों के विरुद्ध सशश्त्र जिहाद करने का आदेश दे दिया .चूंकि उस समय भारत पर अंगरेजों की हुकूमत थी . इसलए मुसलमान उनके भी शत्रु बन गए . इसे भी खिलाफत मूवमेंट कहा जाता है . इसी लिए इलाहबाद में इकबाल ने कहा था ,
    " हो जाये अगर शाहे खुरासां का इशारा , सिजदा न करूँ हिन्द की नापाक जमीं पर "
    यानी अगर तुर्की का खलीफा इशारा भी कर दे तो हम भारत की नापाक जमीन पर नमाज भी नहीं पड़ेंगे ." चूँकि नापाक का अर्थ अपवित्र होता है .और उसका विलोम शब्द "पाक " यानि पवित्र होता है . यही शब्द पाकिस्तान की बुनियाद है .

    2-पाकिस्तान के सात अक्षर
    इकबाल के द्वारा भारत यानि हिंदुस्तान के लिए कहे गए शब्द "नापाक " का उल्टा या Opposit शब्द पाक होता है .इसी को लेकर पकिस्तान शब्द बनाया गया . जिसका अर्थ पवित्र देश होता . वैसे यह दो शब्दों "पाक +स्तान " से बना हुआ लगता है .परन्तु उर्दू के इसके सात अक्षर हैं . जिनके हरेक अक्षर से पाकिस्तान के उन हिस्सों या प्रान्तों का पता चलता है ,जो जिन्ना पाकिस्तान में शामिल करना चाहता था . लेकिन कई हिस्से शामिल नहीं हो सके . यह सात अक्षर इस प्रकार हैं '
    1 .पे -پ -प -= ( पंजाब )
    2 .आलिफ-ا - अ =असम ( पूर्वोत्तर प्रांत )
    3 .काफ़ - ک - क =कश्मीर
    4 .सीन - س -स =सिन्ध
    5 .ते - ت-त =तराई (गंगा यमुना का सिंचित क्षेत्र )
    6 .अलिफ - ا -अ = अवध ( पूरा यूपी )
    7 .नून - ن -न = निजाम ( हैदराबाद )
    इस तरह इन उर्दू के सात अक्षरों से मिलकर "पाकिस्तान - پاکستان " शब्द बना है .जो उसके क्षेत्र को भी प्रदर्शित करता है .मगर
    इन में से चार हिस्से असम , कश्मीर , अवध ,तराई और निजाम पकिस्तान को नहीं मिले .जिन्ना ने कराची में जब 14 अगस्त 1947 को पहली बार पाकिस्तान का झंडा फहराया ,तो कहा था कि इन हिन्दुओं ने हमारे साथ धोखा किया ,और आधा अधूरा ,टूटा फूटा पाकिस्तान दे दिया है यह सुन कर सुहरावर्दी ने जिन्ना से कहा था ,आप कुछ समय सब्र करिए ,देखना एक दिन यही हिन्दू पूरा हिंदुस्तान चांदी की तश्तरी पर रख कर आपको पेश कर देंगे . आज यह सेकुलर जिन्ना के उसी सपने को साकार कर रहे हैं ..
    .पुराने लोगों को याद होगा उन दिनों मुसलमान यह नारा लगाते थे ,
    " हंस के लिया है पाकिस्तान ,लड़ के लेंगे हिन्दुस्तान "
    इसी लिए पाकिस्तान किसी बहाने भारत से तब तक लड़ता रहेगा ,जब तक यातो पाकिस्तान मिट जाये या भारत इस्लामी देश बन जाये .लोग कुछ भी करें या कहते रहें पाकिस्तान से दोस्ती कभी नहीं होगी .

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  2. 3-भारत में पाकिस्तान
    अब तक उस पकिस्तान की बात बताई गयी ,जो प्रकट दिखाई देता है ,लेकिन एक गुप्त पाकिस्तान भी है ,जो भारत में फैला हुआ है . आप भारत के किसी ऐसे शहर को देखिये जिसके नाम के आगे " बाद " शब्द लगा हुआ हो , जैसे अहमदाबाद (कर्णा वती ) फैजाबाद (अयोध्या ) अकबराबाद (आगरा ) मुरादाबाद इत्यादि , आप इन सभी शहरों में जाकर देखिये इनमें कई मोहल्ले मुस्लिम बहुल होंगे , वहीँ जिहादी आतंकवादी शरण लेते हैं .जिनकी यहाँ के मुसलमान मदद करते हैं .और जब इन शहरों के मुसलमानों की संख्या इतनी बढ़ जाएगी कि यह शहर फ़ैल कर दुसरे मुस्लिम शहर से मिल जायेंगे तो उतना भाग खुद पाकिस्तान बन जायेगा .यह प्रक्रिया चल रही है .

    4-पंचमार्गी या गद्दार
    विश्व के लगभग सभी देशों को आसपास की सीमाओं पर चारों तरफ से शत्रु से खतरा हो सकता है ,या किसी भी देश पर को चारों तरफ से हमला किया जा सकता है . लेकिन हमारी कमजोरी है कि भारत पर पाँचों तरफ हमला हो रहा है , क्यों भारत के अन्दर " पंच मार्गी Fifth columnist " मौजूद हैं .अन्दर के गद्दारों के लिए यह शब्द 1938 में उस समय बनाया गया था . जब जर्मन सेना "चेकोस्लोवालिया " पर हमले की तय्यारी कर रही थी .उस समय जर्मन सेनापति "होफमेन Hofman " ने हिटलर से कहा था कि हमारी सेना ने "चेकोस्लोवालिया Czekoslovakia " को पाँचों तरफ से घेर लिया है . हिटलर ने पूछा कैसे ? तो होफ्मेन ने बताया कि जब हमारी सेना चारों तरफ से "चेकोस्लोवालिया " पर हमला करेगी तो , वहां के अल्प संख्यक जर्मन युवक अंदर से हमारी मदद करेंगे . और ऐसा ही हुआ . उन युवकों ने देश भर में , लूट , हत्या ,वीस्फोट , आतंक और अपहरण की भरमार करके अराजकता फैला दी , जिस से जर्मन सेना को "चेकोस्लोवालिया " कब्ज़ा करने में देर नहीं लगी .
    दुर्भाग्य है कि आज भारत कई शहरों में पांचमार्गी मौजूद है . को मौका देख रहें हैं कि कब पाकिस्तान भारत पर हमला करे , और हम खुल कर उसकी मदद करें . अभी तक तो यह लोग इधर उधर आतंकी वारदात करते ही रहते हैं .बाद में उनके साथ सेकुलर भी शामिल हो जायेंगे !

    सावधान यह सीमा विवाद या भारत पाक समस्या या आतंकवाद की समस्या नहीं है ,जिसका हल हो जायेगा . यह इस्लामी विस्तारवादी योजना है . जिसका उदेश्य विश्व में इस्लामी राज्य की स्थापना करना है .
    और इसका जवाब सिर्फ धर्मयुद्ध से ही हो सकता है . समझ लीजिये यदि मारोगे नहीं तो मारे जाओगे !

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  3. 3-भारत में पाकिस्तान
    अब तक उस पकिस्तान की बात बताई गयी ,जो प्रकट दिखाई देता है ,लेकिन एक गुप्त पाकिस्तान भी है ,जो भारत में फैला हुआ है . आप भारत के किसी ऐसे शहर को देखिये जिसके नाम के आगे " बाद " शब्द लगा हुआ हो , जैसे अहमदाबाद (कर्णा वती ) फैजाबाद (अयोध्या ) अकबराबाद (आगरा ) मुरादाबाद इत्यादि , आप इन सभी शहरों में जाकर देखिये इनमें कई मोहल्ले मुस्लिम बहुल होंगे , वहीँ जिहादी आतंकवादी शरण लेते हैं .जिनकी यहाँ के मुसलमान मदद करते हैं .और जब इन शहरों के मुसलमानों की संख्या इतनी बढ़ जाएगी कि यह शहर फ़ैल कर दुसरे मुस्लिम शहर से मिल जायेंगे तो उतना भाग खुद पाकिस्तान बन जायेगा .यह प्रक्रिया चल रही है .

    4-पंचमार्गी या गद्दार
    विश्व के लगभग सभी देशों को आसपास की सीमाओं पर चारों तरफ से शत्रु से खतरा हो सकता है ,या किसी भी देश पर को चारों तरफ से हमला किया जा सकता है . लेकिन हमारी कमजोरी है कि भारत पर पाँचों तरफ हमला हो रहा है , क्यों भारत के अन्दर " पंच मार्गी Fifth columnist " मौजूद हैं .अन्दर के गद्दारों के लिए यह शब्द 1938 में उस समय बनाया गया था . जब जर्मन सेना "चेकोस्लोवालिया " पर हमले की तय्यारी कर रही थी .उस समय जर्मन सेनापति "होफमेन Hofman " ने हिटलर से कहा था कि हमारी सेना ने "चेकोस्लोवालिया Czekoslovakia " को पाँचों तरफ से घेर लिया है . हिटलर ने पूछा कैसे ? तो होफ्मेन ने बताया कि जब हमारी सेना चारों तरफ से "चेकोस्लोवालिया " पर हमला करेगी तो , वहां के अल्प संख्यक जर्मन युवक अंदर से हमारी मदद करेंगे . और ऐसा ही हुआ . उन युवकों ने देश भर में , लूट , हत्या ,वीस्फोट , आतंक और अपहरण की भरमार करके अराजकता फैला दी , जिस से जर्मन सेना को "चेकोस्लोवालिया " कब्ज़ा करने में देर नहीं लगी .
    दुर्भाग्य है कि आज भारत कई शहरों में पांचमार्गी मौजूद है . को मौका देख रहें हैं कि कब पाकिस्तान भारत पर हमला करे , और हम खुल कर उसकी मदद करें . अभी तक तो यह लोग इधर उधर आतंकी वारदात करते ही रहते हैं .बाद में उनके साथ सेकुलर भी शामिल हो जायेंगे !

    सावधान यह सीमा विवाद या भारत पाक समस्या या आतंकवाद की समस्या नहीं है ,जिसका हल हो जायेगा . यह इस्लामी विस्तारवादी योजना है . जिसका उदेश्य विश्व में इस्लामी राज्य की स्थापना करना है .
    और इसका जवाब सिर्फ धर्मयुद्ध से ही हो सकता है . समझ लीजिये यदि मारोगे नहीं तो मारे जाओगे !

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  4. दूध को कितना ही उबालो वह फटता नहीं , बलिक रबरी बन जाता है। तेज़ाब की कुछ बूंदे ही पूरे कडाहे को फाड़ने के लिए काफी है. अब्रह्मिक धर्म ने भारतीय समाज में निम्बू निचोड़ा है. सबसे पहले यह अपने माजी को भूलने की बात करते है. अपनी लकीर को बड़ा दिखाने के लिए दुसरे की लकीर को मिटाना . कुछ करोड़ देवी देवता व् संसार के ४ मौलिक धर्म यह हमारी सभ्यता के अनेकांत वाद का उदाहरण है. इस में मंत्र तंत्र भी है , हिन्दू धर्म के अति विस्तृत सभ्यता ,व्यावहारिकता व् इंसानियत सिख धर्म की , व् जैन व् बौध धर्म जैसा परिष्कृत चिंतन भी। बहुत सी कमियां भी पर आत्म मंथन व् शोधन की यात्रा भी।
    भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकतर मुस्लमान शायद ५०० साल पहले हिन्दू होंगे। हिंदी है हम सब वतन है हिंदुस्तान हमारा। फावड़े को फावड़ा कहे। धर्म के नाम पर स्वयम को अलग बताना व् अपने इतिहास को भूलना यह किसी भी मतावलंबियों की भारी भूल होगी। अपने की गरिष्ठता का यह राग अब बंद करो। अल्लाह के आलावा और भी श्रधेय लोग है. हम भी गेहूं खातें है और तुम भी। यह देश सब का है जो यहाँ पैदा हुआ है। अपना केंद्र देश के बाहर मध्य एशिया में ढूदना बंद कीजिये। अपने माजी का एहतराम कीजिये। तब ही यह कशीदगी कम होगी।
    फावड़े को फावड़ा कहे। बच्चो को इतिहास सही पढ़ाएं।
    पडोसी मुल्क की फ़िक्र करने की ज़रुरत नहीं। कोई मदद मांगे तो उसे गले से लगाये। कोई आपके घर पर हमला करे तो बाड़ लगाये बहुत मज़बूत। पडोसी मुल्क से बहुत कुछ लेने को नहीं। अपने अंतर्विरोधों में स्वयम डूब रहा है. उस देश का केंद्र स्वयम में नहीं। सब कुछ मांगे का है। किसी भी समाज का यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य है.

    Sameerjain.63 @gmail.com

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